पोस्टर विवाद में ट्वीटर के सीईओ डोरसे को राहत, हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द किया

राजस्थान उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में ट्वीटर के सीईओ जैक डोरसे को बहुत बड़ी राहत मिली। हाईकोर्ट ने डोरसे के खिलाफ पूर्व में अधीनस्थ अदालत की तरफ से पोस्टर विवाद में एफआईआर दर्ज के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही डोर्सी के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने का आदेश दिया।  


 राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई गत माह पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अपना फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश मेहता ने कहा कि वर्ष 2018 में जोधपुर के बासनी पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर व इसके आधार पर जारी अन्य पर जारी अन्य प्रक्रिया को खारिज किया जाता है। विप्र फाउंडेशन के युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने ब्राह्मण विरोधी पोस्ट शेयर करने के खिलाफ याचिका पर गत वर्ष अधीनस्थ न्यायालय ने डोरसे के खिलाफ मामला दर्ज करने आदेश दिए थे। डोरसी ने इसे राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। डोरसी की तरफ से प्रसिद्ध अधिवक्ता महेश जेठमलानी पैरवी करने जोधपुर आए थे। 


यह है मामला


वर्ष 2018 में अपनी भारत यात्रा के दौरान जैक डोरसे ने एक पोस्टर का विमोचन किया था। पोस्टर को लेकर जैक डोरसे विवादों में घिर गए थे। इसे लेकर उनकी खूब आलोचना भी हुई और जाति विशेष का विरोध करने का आरोप लगा था। विप्र फाउंडेशन के युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने ब्राह्मण विरोधी पोस्ट शेयर करने के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे स्थानीय अदालत ने स्वीकार कर लिया था। मेट्रोपॉलिटन जज ने 1 दिसम्बर 2019 को इस याचिका को स्वीकार करते हुए डोरसे के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था।