शहर में मंगलवार को मिले 9 मरीजों सहित अब कुल 30 जने कोरोना संक्रमित सामने आ चुके है। संक्रमितों की बढ़ती संख्या देख दबाव में आए प्रशासन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब तक मिले 30 पॉजिटिव में से 25 ऐसे लोग थे जिनमें कोरोना का कोई भी लक्षण प्रकट नहीं हुआ था। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे लोगों को तलाश कर अस्पताल तक पहुंचाने की है ताकि ये लोग दूसरों को संक्रमित न कर सके।
शहर में 625 लोग ऐसे थे जो करोना जैसे लक्षण नजर आने पर स्वयं पहल कर अपनी जांच कराने के लिए अस्पताल पहुंचे। इनमें से महज 5 लोग पाजिटिव पाए गए। वहीं प्रशासन की ओर से 21,106 घरों में सर्वे कराया गया। इस दौरान ट्रेवल हिस्ट्री के आधार पर महज 4 लोगों का पता चल पाया। वहीं पहले से संक्रमित लोगों के संपर्कों में आए 206 लोगों में से 21 जने कोरोना पॉजिटिव पाए गए है। सबसे बड़ी खासियत की बात यह है कि 30 में से 25 लोगों में कोरोना से जुड़ा किसी प्रकार का लक्षण नजर ही नहीं आया था, फिर भी वे पॉजिटिव निकले।
डॉक्टरों का कहना है कि कई लोगों में कोरोना के लक्षण प्रकट होने में कुछ दिन लगते है। इस कारण लोगों को इस बात का अहसास तक नहीं हो पाता है कि वे कोरोना से संक्रमित हो चुके है। प्रशासन का कहना है कि ऐसे में अभी शहर में कुछ लोग और भी है, जिनमें कोरोना के लक्षण अभी तक प्रकट नहीं हुए है, लेकिन वे अन्य मरीजों के संपर्क में आने के कारण संक्रमित हो चुके है।
प्रशासन ने बदली रणनीति
कर्फ्यू प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर किए जा रहे सर्वे की प्रशासन ने अब रणनीति पूरी तरह से बदल दी है। पहले चिकित्सा विभाग के कर्मचारी घर के किसी एक सदस्य से जानकारी लेकर निकल जाते थे। अब आज से घर के प्रत्येक सदस्य को बाहर बुलाकर उससे बात कर जानकारी ली जा रही है। थोड़ा शक होते ही डॉक्टर को बुलाकर जांच कराई जा रही है। साथ ही तीन अलग-अलग श्रेणी बनाकर जांच की जा रही है। इसके तहत 60 साल से अधिक आयु के, गर्भवती महिलाएं व खांसी-जुकाम से पीड़ित लोगों पर फोकस किया जा रहा है। इस तरह अब सख्ती के साथ स्क्रीनिंग करने से कुछ बेहतर नतीजे मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का कहना है कि हम कोशिश कर रहे हैं कि बहुत साधारण लक्षण वाले संक्रमित लोगों की तलाश कर सकें।